न्यूज़ डेस्क, लखनऊ
जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अखिलेश के आरोपों पर योगी सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए उनके दावों को निराधार बताया। नेताओं ने जेपीएनआईसी की लागत, निर्माण में देरी और परियोजना को पूरा करने की मौजूदा योजना को लेकर सपा शासन पर सवाल उठाए।
संजय निषाद बोले- जेपीएनआईसी का अधिकार एलडीए के पास
मंत्री संजय निषाद ने कहा कि देश संविधान और संवैधानिक व्यवस्था के तहत चलता है और विकास प्राधिकरण इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जेपीएनआईसी का अधिकार लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के पास है। प्राधिकरण और निजी संस्था के बीच अंतर समझने की जरूरत है।
संजय निषाद ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जेपीएनआईसी के भवन का विकास और उसका संचालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने सपा, बसपा और कांग्रेस के शासनकाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि आज प्रदेश में विकास हो रहा है, इसलिए जनता एनडीए के साथ खड़ी है।
बीएल वर्मा ने सपा शासन पर साधा निशाना
केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने अखिलेश यादव के आरोपों पर कहा कि उन्हें समाजवादी पार्टी के शासनकाल को भी याद करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में गरीबों के राशन में भी भ्रष्टाचार होता था और बिचौलिये गरीबों का हक खा जाते थे।
बीएल वर्मा ने कहा कि सरकारी काम नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव को भाजपा सरकार का विकास दिखाई नहीं देता तो उन्हें ‘विकास का चश्मा’ लगाकर देखना चाहिए।
राकेश राठौर गुरु ने लागत को लेकर घेरा
राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु ने कहा कि जेपीएनआईसी की परियोजना का बजट पहले करीब 700 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर लगभग 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने परियोजना की स्थिति का आकलन किया तो यह अधूरी मिली। अब इसे पूरा कर फंक्शनल करने के लिए करीब 200 से 250 करोड़ रुपये की जरूरत है। सरकार की कोशिश है कि परियोजना जल्द शुरू हो और इसका लाभ जनता को मिले।
जगदंबिका पाल ने कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश से इसलिए गई क्योंकि उसके शासनकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठते थे। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सपा सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को नए राजनीतिक संकल्प लेने से पहले अपने शासनकाल की कानून-व्यवस्था और महिलाओं से जुड़े मामलों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
ऋचा राजपूत बोलीं- सवाल उठाकर खुद घिर रहे अखिलेश
भाजपा नेता ऋचा राजपूत ने कहा कि जेपीएनआईसी को लेकर सवाल उठाकर अखिलेश यादव खुद अपने शासनकाल के सवालों के घेरे में आ रहे हैं। उन्होंने पूछा कि परियोजना की लागत करीब 800 करोड़ रुपये तक कैसे पहुंची और इतनी लागत बढ़ने के बावजूद काम समय पर पूरा क्यों नहीं हुआ।
ऋचा राजपूत ने कन्नौज के इत्र पार्क और पीलीभीत-मुरादाबाद में नगरपालिका की जमीन पर सपा कार्यालय बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जितने सवाल उठाएंगे, उतनी ही पुरानी बातें जनता के सामने आएंगी।
17 करोड़ की DPR से 800 करोड़ तक पहुंची लागत- दिनेश सिंह
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश सिंह ने जेपीएनआईसी के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2006 में परियोजना की DPR करीब 17 करोड़ रुपये की थी। उनके मुताबिक, वर्ष 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इसकी लागत बढ़कर करीब 800 करोड़ रुपये हो गई, लेकिन सपा सरकार के कार्यकाल में परियोजना पूरी नहीं हो सकी।
दिनेश सिंह ने कहा कि योगी सरकार आने के बाद निर्माण कार्य को फिर गति दी गई। अब जेपीएनआईसी को पूरी तरह फंक्शनल करने के लिए करीब 200 से 250 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसी वजह से सरकार ने इसे लीज पर देने का फैसला किया है, ताकि अधूरे काम को पूरा किया जा सके।
उन्होंने अखिलेश यादव के जेपीएनआईसी को बेचने के आरोप को गलत बताते हुए कहा कि सरकार की व्यवस्था का उद्देश्य परियोजना को पूरा कर जनहित में इस्तेमाल करना है। दिनेश सिंह ने सपा शासन पर ‘लूट और बंदरबांट’ का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में पारदर्शिता के साथ विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
