आगरा के नरायच क्षेत्र में ‘शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सेवाएं’ (BSUP) योजना के तहत बने 3640 आवास आज भी हजारों गरीब परिवारों के लिए अधूरे सपने बने हुए हैं। वर्ष 2009 में शुरू हुई इस योजना के तहत मजदूरों, रिक्शा चालकों और विधवा महिलाओं से मामूली रकम जमा कराकर पक्के मकान देने का वादा किया गया था, लेकिन 17 साल बाद भी हालात नहीं बदले।
आईआईटी रुड़की की जांच रिपोर्ट में इन आवासों को रहने लायक नहीं बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और कई पिलर व दीवारों में गंभीर दरारें पाई गईं, जिससे ये मकान खंडहर में बदलते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन, आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए), नगर निगम और डूडा कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते पूरी एक पीढ़ी गुजर गई, लेकिन समाधान नहीं मिला। कई परिवार आज भी जर्जर और असुरक्षित इमारतों में रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन का कहना है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और फैसले के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
