लखनऊ। चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में कैंसर मरीजों के इलाज की दिशा में एक अहम पहल शुरू हुई है। अब मरीजों को एक जैसी दवा देने के बजाय उनकी बीमारी की आनुवंशिक बनावट (जीन प्रोफाइल) के आधार पर इलाज तय करने में मदद मिलेगी। संस्थान में बुधवार को सेंटर फॉर एडवांस्ड मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड रिसर्च फॉर कैंसर (CAMDRC) की क्लीनिकल सेवाएं शुरू कर दी गईं।
केंद्र में नेक्स्ट जनरेशन सिक्वेंसिंग (NGS) आधारित जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसके जरिए कैंसर के लिए जिम्मेदार जीन में होने वाले बदलावों की पहचान की जा सकेगी। इससे मरीज के लिए टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी के चयन में डॉक्टरों को मदद मिलेगी।
एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का लक्ष्य
कानपुर आईआईटी के निदेशक डॉ. मणीनद्र अग्रवाल ने बताया कि नई तकनीक वाली मशीन से जांच प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा। केंद्र का लक्ष्य करीब एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का है। फिलहाल इस तरह की जीन आधारित जांच में सामान्य तौर पर 14 से 15 दिन तक का समय लग जाता है।
जांच की अनुमानित कीमत 20 हजार से 32 हजार रुपये तक होगी। इस जांच के जरिए करीब 50 तरह के जीन में होने वाले बदलावों की पहचान की जा सकेगी।
सरकारी और निजी अस्पतालों के मरीज करा सकेंगे जांच
संस्थान के निदेशक डॉ. एमएलबी भट्ट ने बताया कि इस सुविधा का लाभ सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों और अन्य संस्थानों के मरीज भी उठा सकेंगे। केंद्र में सॉलिड ट्यूमर की टिश्यू बायोप्सी और लिक्विड बायोप्सी, दोनों के जरिए जीनोमिक प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध है।
इससे विभिन्न अंगों के कैंसर में इलाज से जुड़े आनुवंशिक बदलावों की पहचान की जा सकेगी। सॉलिड बायोप्सी के तहत ब्लैडर, ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, गैस्ट्रिक, लिवर, फेफड़े, ओवरी, पैंक्रियाज, प्रोस्टेट और थायरॉयड समेत कई प्रकार के कैंसर की जांच की जाएगी।
लिक्विड बायोप्सी के जरिए भी इन प्रमुख कैंसर में जीन संबंधी बदलावों की जांच की जा सकेगी।
जीन प्रोफाइल के आधार पर चुनी जा सकेगी दवा
इस जांच का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीज के ट्यूमर की जीन प्रोफाइल के आधार पर इलाज और दवा के चयन में मदद मिलेगी। खास आनुवंशिक बदलाव वाले मरीजों में उनके लिए उपयुक्त टारगेटेड इलाज चुनने में इससे डॉक्टरों को सहायता मिलेगी।
उत्तर भारत के लिए क्षेत्रीय हब बनेगा केंद्र
सीएएमडीआरसी को उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के लिए क्षेत्रीय हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुंबई स्थित कॉर्किनोस हेल्थकेयर के चीफ डायग्नोस्टिक्स एंड रिसर्च ऑफिसर डॉ. श्रीधर शिवसुब्बू ने बताया कि जिला अस्पतालों और क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों को इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
इसका उद्देश्य यह है कि मरीजों को जीन आधारित जांच के लिए दूसरे महानगरों का रुख न करना पड़े। केंद्र में भविष्य में टेली-कंसल्टेशन, डिजिटल पैथोलॉजी और वर्चुअल ट्यूमर बोर्ड जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।
कार्यक्रम में डीन डॉ. प्रमोद गुप्ता, सीएमएस डॉ. विजेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरूण विजय, कुलसचिव डॉ. आयुष लोहिया, वित्त अधिकारी उपेंद्र तिवारी, पैथोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. दीप्ति मिश्रा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
