राजधानी में इन्फ्लुएंजा-ए H1N1 के छह नए मरीज मिले हैं। इसके साथ ही जनपद में एक्टिव केसों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। वहीं, डेंगू का बुधवार को कोई नया मरीज नहीं मिला।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से जारी गाइडलाइन के अनुसार गंभीर लक्षण वाले मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
गंभीर लक्षण दिखने पर RT-PCR जांच जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार तेज बुखार के साथ सीने में दर्द, बेहोशी, रक्तचाप कम होना, सांस फूलना, नाखूनों का नीला पड़ना या बलगम में खून आना जैसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को गंभीर श्रेणी में रखा जाना चाहिए। ऐसे मरीजों की रियल टाइम RT-PCR जांच कराई जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
वहीं, बुखार, जुकाम, गले में खराश, खांसी या फ्लू जैसे सामान्य लक्षण वाले मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई है।
बच्चों में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सीएमओ ने बताया कि पहले से किसी गंभीर या पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीज की स्थिति बिगड़ने पर उसे भी गंभीर श्रेणी में रखा जाना चाहिए। ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होती है।
इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले बच्चों में असामान्य उनींदापन, अत्यधिक सुस्ती, लगातार तेज बुखार, भोजन या तरल पदार्थ लेने में असमर्थता, झटके आना, तेज सांस चलना या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण गंभीर माने जाते हैं। ऐसे मामलों में RT-PCR जांच और जरूरत के अनुसार अस्पताल में भर्ती कर उपचार कराने के निर्देश हैं।
सामान्य लक्षण वाले मरीजों को RT-PCR की जरूरत नहीं
स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के मुताबिक सामान्य लक्षण वाले मरीजों को रियल टाइम RT-PCR जांच कराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मरीजों को घर पर पर्याप्त आराम करने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा लेने की सलाह दी गई है।
साथ ही संक्रमण फैलने से रोकने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के निकट संपर्क से बचने को कहा गया है। खासतौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और डायबिटीज, रक्त एवं तंत्रिका विकार जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण पर जोर
इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीजों के इलाज के दौरान संक्रमण नियंत्रण के मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में मरीजों की स्क्रीनिंग, जरूरत के अनुसार अलग व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमण से बचाव और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
क्या करें
- मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या कपड़े से ढकें।
- पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहें।
- आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
- बुखार या बदन दर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा लें।
क्या न करें
- हाथ मिलाने या निकट संपर्क वाले अभिवादन से बचें।
- सार्वजनिक स्थानों पर न थूकें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें।
- अस्वस्थ होने पर दूसरों के साथ बैठकर भोजन करने से बचें।
