आजकल कई लोग शिकायत करते हैं कि वे रात में जल्दी सो जाते हैं, फिर भी सुबह उठकर फ्रेश महसूस नहीं करते। पर्याप्त घंटे की नींद लेने के बावजूद शरीर में सुस्ती और थकान बनी रहती है। इसका कारण सिर्फ नींद की कमी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कुछ आदतें भी हो सकती हैं, जो नींद की क्वालिटी को खराब कर देती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी नींद केवल घंटों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी गुणवत्ता (quality sleep) ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता स्क्रीन टाइम, तनाव और अनियमित दिनचर्या नींद के प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ देते हैं।
सोने से पहले ज्यादा स्क्रीन टाइम
मोबाइल या लैपटॉप का लंबे समय तक इस्तेमाल नींद के हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित करता है। इससे दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाता और नींद गहरी नहीं आती।
दिनभर फिजिकल एक्टिविटी की कमी
अगर आप दिनभर बहुत कम चलते-फिरते हैं, तो शरीर को पर्याप्त थकान नहीं मिलती। ऐसे में रात की नींद हल्की रह जाती है और सुबह थकान महसूस होती है।
दिन में लंबी झपकी लेना
दोपहर में ज्यादा देर तक सोने से शरीर का स्लीप साइकल बिगड़ जाता है। इसका असर रात की नींद पर पड़ता है और नींद पूरी होने के बावजूद फ्रेशनेस नहीं आती।
कम पानी पीना
डिहाइड्रेशन से शरीर में सिरदर्द, बेचैनी और मुंह सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे रात में नींद बार-बार टूटती है और नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है।
बार-बार अलार्म लगाना और स्नूज़ करना
कई लोग कई अलार्म सेट करके बार-बार स्नूज़ करते हैं। इससे नींद बार-बार टूटती है और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल पाता, जिससे सुबह थकान बनी रहती है।
