लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की डिजिटल और आर्थिक सशक्तीकरण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों के अनुसार बीते चार वर्षों में इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या दोगुने से अधिक बढ़ गई है। इसके साथ ही घरेलू हिंसा के मामलों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।l
रिपोर्ट के मुताबिक, NFHS-5 में जहां केवल 30.6 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। बैंक खातों का स्वयं संचालन करने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी 75.4 से बढ़कर 83.5 हो गया है। वहीं मोबाइल फोन का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या 46.5 प्रतिशत से बढ़कर 56.4 प्रतिशत दर्ज की गई है।
महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक भागीदारी में भी सुधार देखने को मिला है। 10 वर्ष या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 39.3 से बढ़कर 42.5 हो गया है। वहीं काम के बदले नकद भुगतान प्राप्त करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 15.5 प्रतिशत से बढ़कर 21.1 प्रतिशत पहुंच गई है।
महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर भी राहत भरे संकेत मिले हैं। पति द्वारा किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 34.9 से घटकर 28.5 प्रतिशत रह गया है, जो सामाजिक जागरूकता और सशक्तीकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।
हालांकि, सर्वेक्षण में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों में स्वच्छ मासिक धर्म सुरक्षा साधनों के उपयोग का प्रतिशत 72.9 से घटकर 69.2 रह गया है। इसके अलावा घरेलू निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी भी 87.6 प्रतिशत से घटकर 85.9 प्रतिशत दर्ज की गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री डॉ. पवन मिश्रा का कहना है कि इंटरनेट अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रभावी साधन बन चुका है। डिजिटल पहुंच बढ़ने के साथ महिलाएं अपने अधिकारों और अवसरों के प्रति अधिक जागरूक हो रही हैं।
